बिहार में खुलेआम बन रहा है फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, हस्ताक्षर की जगह लिखा है एडीएम!

सर्टिफिकेट जांचने सदर अस्पताल पहुंचे दो लोग, सदर के नाम पर बन रहा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बिहार के मुजफ्फरपुर में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आया है. बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार में फर्जी जीवन प्रमाणपत्र बनाने वाला सिंडिकेट रैकेट सक्रिय है. घटना की जानकारी मिलने के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस ने दावा किया है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वालों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के नाम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया जा रहा है. शुक्रवार को दो लोग फर्जी जन्म प्रमाणपत्र लेकर अस्पताल कार्यालय पहुंचे. यहां जांच में इसे फर्जी करार दिया गया। मामला सामने आने के बाद दोनों वहां से भाग गए.

स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे दो व्यक्ति अस्पताल कार्यालय पहुंचे. उन्होंने प्रमाणपत्र दिखाया और इसके बारे में पूछताछ की। जब प्रमाणपत्र की जांच की गई तो उस पर किया गया हस्ताक्षर फर्जी पाया गया. अस्पताल स्टाफ ने दोनों लोगों से कई बार पूछा कि उन्हें यह सर्टिफिकेट किसने दिया है, लेकिन दोनों बिना जवाब दिए चले गए। सदर अस्पताल से जुड़े लोगों ने बताया कि अस्पताल में जन्म या मृत्यु होने पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक इसका प्रमाण पत्र बनाते हैं. जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रार उपाधीक्षक होते हैं। अस्पताल में आये प्रमाण पत्र पर उपाधीक्षक का हस्ताक्षर फर्जी पाया गया. सिविल सर्जन डॉ. ज्ञान शंकर ने बताया कि यह प्रमाणपत्र कहां से बन रहा है, इसकी जांच करायी जायेगी.

अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चे को ही यहां से प्रमाणपत्र मिलता है। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि पिछले साल करीब 20 फर्जी सर्टिफिकेट पकड़े गये थे. प्रमाणपत्र के सत्यापन के समय इस फर्जीवाड़े का पता चल रहा है। सदर अस्पताल के पैड पर फर्जी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले लोगों को वापस किया जा रहा है. सदर अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र अस्पताल ही जारी करता है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार सदर अस्पताल ही नहीं बल्कि पीएचसी व सीएचसी के भी फर्जी प्रमाणपत्र का मामला सामने आया है.

हस्ताक्षर की जगह एडम लिखा है

फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच में पता चला है कि उस पर उपाधीक्षक के हस्ताक्षर की जगह एडम लिखा हुआ है. इसे इस तरह लिखा गया है कि तुरंत पता नहीं चलता कि यह उपाधीक्षक का हस्ताक्षर नहीं है. जन्म प्रमाण पत्र किसी के फर्जी सॉफ्टवेयर से बनाया जा रहा है, जिससे एक नजर में यह असली लगता है।

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