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जींस पहनने पर ऐसी सजा! नहीं मिली परीक्षा में बैठने की अनुमति, छात्रों ने किया हंगामा, क्या है पूरा मामला?

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सीवान के भगवानपुर हाट थाना क्षेत्र स्थित एसएस हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज में ड्रेस कोड का उल्लंघन करने पर सोमवार को 60 छात्रों को इंटरमीडिएट की सेंटअप परीक्षा से वंचित कर दिया गया. इसके बाद इन छात्रों ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर हंगामा किया. जिसके बाद पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के निर्देश पर सोमवार से इंटरमीडिएट की सेंटअप परीक्षा शुरू हो गई. सेंटअप परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को ही अगले साल बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा. इस परीक्षा के लिए जींस पहनकर पहुंचे छात्रों को स्कूल प्रशासन ने विभागीय निर्देश का हवाला देकर सेंटअप परीक्षा से वंचित कर दिया. साथ ही करीब 100 छात्र जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम थी, उन्हें भी परीक्षा से वंचित कर दिया गया.

कॉलेज के प्राचार्य ने बताया कि शिक्षा विभाग के पूर्व एसीएस केके पाठक ने शिक्षकों समेत छात्रों के जींस पहनकर स्कूल आने पर रोक लगा दी थी. इसके आलोक में डीईओ स्तर से पत्र जारी कर छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को ड्रेस कोड में स्कूल आने को कहा गया था। डीईओ कार्यालय ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर कोई शिक्षक या छात्र जींस व टी-शर्ट पहनकर स्कूल आता है तो इसके लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे। जिसके बाद जींस पहनकर सेंटअप परीक्षा देने आए करीब 60 छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया।

उपेंद्र कुशवाहा ने आरजेडी पर कसा तंज, कहा-नीतीश कुमार सिर से पांव तक समाजवादी हैं, तेजस्वी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं

उपेंद्र कुशवाहा ने आरजेडी पर कसा तंज, कहा-नीतीश कुमार सिर से पांव तक समाजवादी हैं, तेजस्वी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं

पटना: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने चार सीटों पर हो रहे उपचुनाव में जीत का दावा किया है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सभी सीटों पर एनडीए गठबंधन के उम्मीदवार जीतेंगे. उन्होंने कहा कि हम रामगढ़ गए, प्रचार किया. जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि बिहार में सभी सीटों पर एनडीए गठबंधन जीतेगा.

जब उपेंद्र कुशवाहा से पूछा गया कि तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि नीतीश बिहार में सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा दे रहे हैं, तो उन्होंने इस बारे में बड़ा बयान देते हुए कहा कि नीतीश कुमार को तेजस्वी यादव से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है. नीतीश कुमार सिर से पांव तक समाजवादी हैं और उसी के हिसाब से काम कर रहे हैं. अगर कोई नीतीश पर इस तरह के आरोप लगा रहा है, तो वह हर तरह से दिवालिया हैं.

उपेंद्र कुशवाहा ने आरजेडी पर हमला करते हुए कहा कि आरजेडी की क्या हालत है, यह तो सामने आ ही गया है. लालू यादव बीमार हैं और उस हालत में भी उन्हें चुनाव प्रचार के लिए जाना पड़ रहा है. जनता भी जानती है कि पार्टी उन्हें दो-तीन मिनट के भाषण के लिए उस हालत में क्यों ले जा रही है। लालू यादव को लेकर चाहे जितना भी चुनाव प्रचार कर लिया जाए, बिहार में कोई फायदा नहीं होने वाला है।

इस नन्ही dancer की Post आपकी सोच बदल देगी | Bhumika @BhumikaTiwari.official | Hindi

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मैं भूमिका तिवारी, जो एक मशहूर यूट्यूबर हैं, अपने जीवन की कहानी को अपने शब्दों में बयान करती हैं। अपने सफर, चुनौतियों और उनके सामने आए मुश्किलों का जिक्र किया है और कैसे उन्हें सबका सामना किया है। वीडियो में वो अपने अनुभवों और सफलता के रास्ते पर चली कथिन यात्रा के बारे में बताते हैं अपने दर्शकों को प्रेरणा देते हैं। ये वीडियो उन सब लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो सोशल मीडिया या यूट्यूब पर अपना करियर बनाना चाहते हैं और वास्तविक जीवन की चुनौतियों और चुनौतियों को समझना चाहते हैं।

मैं 12 साल की हूं और आज मुझे सोशल मीडिया पे लाखों लोग फॉलो करते सब्सक्राइब करते हैं अब आप लोगों को लग रहा होगा कि इस लड़की की लाइफ तो सेटल हो गई बिल्कुल सब बढ़िया चल रहा है !

उस दिन मेरी मम्मी का कॉल आया मैम के पास और उन्होंने घर घबराती हुई आवाज में बोला कि भूमी जल्दी से घर आ जा और उस समय मेरा शरीर जैसे एक सेकंड के लिए जमसा गया था बिल्कुल कहते हैं कि अगर आप किसी चीज को दिल से चाहे तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने की कोशिश में लग जाती है !

एक छोटे से गांव की वह 8 साल की लड़की की भी यही सोच थी जब वह छोटी थी तो लोगों ने उे रोकने की कोशिश की क्यों क्योंकि वह एक लड़की थी जब वह बड़ी हुई तो उसके हालातों ने उसे रोकने की कोशिश की क्यों क्योंकि वो एक लड़की थी नमस्ते एवरीवन मैं मेरा नाम है!

भूमिका तिवारी मैं 12 साल की हूं और मुझे सोशल मीडिया पे 18 लाख से भी ज्यादा लोग जानते हैं और मैं एक इन्फ्लुएंस हूं डांस की और एक्टिंग की आज मैं जोश टॉक के प्लेटफार्म पर बताने आई हूं कि कैसे यूपी की वो आठ साल की लड़की गांव से हैदराबाद आई अपने सपने को पूरा करने के लिए तो चलिए मैं बताती हूं !

अपनी कहानी मैं उत्तर प्रदेश में इटावा के पास एक बहुत ही छोटे से गांव बहवा से आती हूं मेरे परिवार में मेरे मम्मी पापा और मेरे दो छोटे भाई हैं मेरे पापा एक बहुत ही मेहनती किसान है और जिनकी मंथली इनकम कुछ दो या 3 हज तक ही है और मेरी मम्मी एक हाउसवाइफ है !

जो हमारे परिवार का बहुत अच्छे से ख्याल रखती है वैसे मैं बता दूं कि हमारा परिवार शुरुआत से ही फाइनेंशियल उतना अच्छा नहीं था और हमारे परिवार में टीवी या कूलर भी एक बहुत ही बड़ी लगजरी आइटम होता था फिर मैं पैदा हुई खुश थे मम्मी पापा लेकिन कहीं ना कहीं उनको लोगों के ताने सुनने पड़ते थे !

और कहीं ना कहीं उन तानों की वजह थी मैं क्योंकि पहला बच्चा ही एक लड़की पैदा हो गई थी लेकिन मेरे मम्मी पापा ने कभी भी इस चीज का एहसास नहीं होने दिया मुझे और हमेशा मुझे प्यार से रखा कुछ साल बीतने के बाद मेरा एक छोटा भाई हुआ और जैसे कि आपको पता है!

अगर परिवार में एक सदस्य बढ़ जाता है तो उसके हिसाब से खर्चे भी बढ़ जाते हैं तो पापा उसके लिए और दिन रात कड़ी मेहनत करने लगे फिर मेरा एक और भाई हुआ जब मैं 6 साल की हुई तो मेरा एक और लला पैदा हुआ लला मतलब गांव में भाई को छोटे बच्चों को लला कहते हैं!

सब अच्छा था लेकिन मेरी मम्मी बीमार हो गई थी क्योंकि खाने के अभाव में उनकी बॉडी के अंदर बहुत स डेफिशियेंसी तो घर की सारी जिम्मेदारियां अब मुझ पर आ गई थी भाइयों का ख्याल रखना मम्मी का ख्याल रखना क्योंकि बीमार थी सारी जिम्मेदारी मुझ पर थी स्टार्टिंग में तो पड़ोसियों ने मुझे खाना हमेशा दिया खुशी खुशी दिया !

लेकिन फिर कुछ दिनों बाद उन्होंने बातें करना शुरू कर दिया कि यह तो रोज रोज आ जाती है खाना लेने तो मम्मी ने कहा कि कब तक लोगों के घर पर हम लोग खाना खाएंगे तो उन्होंने मुझे बताया खाना कैसे बनाते हैं ट्रेन किया उन्होने जितना वो कर पाई अब आप लोग सोच रहे होंगे कि इतनी छोटी बच्ची खाना कैसे बनाती होगी !

मैं आपको एक बात बताना चाहूंगी कि हालात ना कुछ भी करवा लेते हैं अब मैंने उस समय जैसे भी रोटी बनाना सीखा कच्ची पक्की एक बार हाथ भी जल गया था जो कॉमन है क्योंकि बनाना आता नहीं था उस समय तो हाथ भी जला कई बार लेकिन मैंने उस समय हार नहीं मानी मैंने अपने भाइयों के लिए मम्मी के लिए यह सब काम किया उसी बीच मैंने स्कूल में भी एडमिशन लिया क्योंकि मेरे पापा चाहते थे कि मैं अच्छे से पढ़ाई करूं स्कूल जाऊं पापा ने जैसे तैसे करके मुझे स्कूल में एडमिशन दिलाया !

मुझे अभी भी याद है कि जब भी पापा सुबह सुबह खेत पर जाते थे तो मैं एकदम से उनका हाथ पकड़ लेती थी और कहती थी पापा पहले तुम हमें स्कूल छोड़ के आओ तब तुम अपने काम पर जाया तो पापा कहते थे चल चरैया तुझे कंधे पर बैठा के ले जाते हैं स्कूल छोड़ छड़ने के बाद तब कहीं पापा का दूसरा काम होता था !

अब आप लोग सोच रहे होंगे कि ये कौन सी भाषा है आगे सब पता चल जाएगा खैर आगे बढ़ते हैं इन सब बीच में एक चीज थी जो मुझे बहुत खुशी देती थी और मुझे बहुत अच्छा फील कराती थी वो था मेरा डांस कहीं भी अगर दूर म्यूजिक बज रहा होता था !

ना तो अपने आप मेरे पैर थिरकने लगते थे और जब भी कोई घर का काम कर रही होती थी तो मेरे पैर अपने अपथ रखने लगते थे और डांस करती रहती थी मैं और जैसे शाम को जब मैं पूरा काम खत्म करके छत प जाती थी ठंडी हवा लेने के लिए तो पड़ोस में एक भैया थे !

जो शाम को काम करते थे अपना और स्पीकर पर गाना चलाते थे तो मुझे जो भी गाना सुनाई देता था मैं उस परे डांस करना शुरू कर देती थी और मैं तब तक डांस करती थी जब तक मैं लुड़क के गिर ना जाऊं और या फिर मेरी मम्मी ना बुलाए भूमि नीचे नहीं आया हो क्या कब तक डांस कर रहे हो सोना नहीं सुबह उठना तुम्हें मम्मी मतलब की गांव की लैंग्वेज है!

तो मैं तुरंत भाग के जाती थी नीचे क्योंकि अब सुबह उठना है चिंता तो रहती थी ना परिवार की ऐसे करते करते मैं 8 साल की हो गई एक दिन क्या हुआ मेरे कजिन विकास भैया की मैम आई गांव में क्योंकि अ वोह उनकी बिजनेस पार्टनर थी तो गांव में आई और जनरली वो बच्चों के लिए किताब पेंसिल और अपनी बेटी के के कपड़े भेजती रहती थी!

तो इत्तेफाक से उस दिन मैं उन्हीं की बेटी का एक स्वेटर पहने हुए थी और अपना काम कर रही थी और डांस कर रही थी उन्होंने मुझे देखा वह मेरी तरफ अट्रैक्ट हुई मेरे पास आई फिर बोला तुम्हें डांस पसंद है मैंने कहा हां मैं बहुत नीको लगा डांस अपने गांव की भाषा में फिर उन्होंने पूछा कि तुम्हें डांसर बनना है !

मैंने हां कह दिया यहां तक मुझे याद है मुझे उस समय डांसर का मतलब भी नहीं पता था पर इतना पता था कि यह डांस रिलेटेड है तो मेरे लिए अच्छा ही होगा मैंने हा कर दिया उस समय फिर उन्होंने कहा अगर तुम्हें डांसर बनना है और डांस सीखना है तो उसके लिए तुम्हारे तुम्हें हमारे साथ हैदराबाद आना पड़ेगा !

मैंने हा कर दिया क्योंकि मुझे लगा मजाक कर रही होंगी क बड़े लोग बच्चों से मजाक करते हैं तो मुझे लगा मजाक कर रही होंगी मैंने हां कर लिया उन्होंने कहा ठीक है फिर शाम को जब मेरे पापा वापस आए थे खेत से काम करके तो मैम जो है सामने गली में खड़ी थी उन्होने देखा मेरे पापा को और उनसे बातचीत की कि भूमिका को हैदराबाद लेकर जा सकते हैं !

पढ़ाई के लिए डांस के लिए पापा ने कहा सोच के बताते हैं मैं अपना काम करर थी एस यूजुअल पापा मेरे पास आए बुलाया मुझे उन्होंने पूछा रे चरैया तुम्हें डांस बनना है हां तक कि मुझे मुझे याद है मैंने उस समय कुछ नहीं बोला था मैं शांत रही थी पापा ने कुछ भी नहीं बोला फिर लेकिन मैम ने विकास भैया ने मेरे कजन भाई ने पापा मम्मी से बात की उन्होने मनाया अब मनाने में समय तो बहुत लगा !

क्योंकि ऑफकोर्स अपना बच्चा कौन किसी को ऐसे देना चाहेगा मनाने में टाइम लगा लेकिन मना ही लिया आखिर में फिर जब जाने की बारी आई तो कहीं ना कहीं मैं खुश भी थी थ चिंतित भी थी क्योंकि मुझे लग रहा था परिवार का ल कौन रखेगा मेरे दो छोटे छोटे भाई है खाना कौन बना के देगा उन्हें लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर तुम वहां पर जाकर कुछ बन गई तो तुम अपने भाइयों का ख्याल भी रख पाओगी !

मम्मी का अच्छा ट्रीटमेंट करवा पाओगी मेरे भाइयों को अच्छे स्कूल में पढ़ा पाओगी मैंने यह सोच के कहा कि मैं ठीक कर रही हूं मुझे चलना चाहिए हैदराबाद मैं मैम के साथ गांव से हैदराबाद गई सबसे पहली चीज जो बहुत सरप्राइजिंग मुझे बहुत ही ज्यादा फ्लाइट जो एयरप्लेन था!

बहुत बड़ा था मैंने सपने में भी इतना बड़ा एयरप्लेन कभी सोचा ही नहीं था मैंने देखा मैं बहुत सरप्राइज हो गई थी फिर मैं फ्लाइट में बैठी और जब व फ्लाइट उड़ी तो मैंने देखा कि नीचे छोटी छोटी लाइट्स थी मेरे दिमाग में आया कि जब मैं जमीन गांव से ऊपर देखती थी आसमान में तो एरोप्लेन इतना छोटा दिखता था !

मुझे और जब मैं एयरप्लेन से नीचे जमीन देख रहा हं जमीन बहुत छोटी दिख रही है यह सोच के मुझे बहुत अच्छा लगा कि हां कुछ अलग है यह फिर मैं फाइनली हैदराबाद पहुंच गई वहां पर जाके सबसे पहले मैं खाने पर टूट पड़ी क्योंकि आपको पता है कि जिस चीज का आपके पास अभाव होता है आप उसी चीज के लिए ज्यादा चाहते कि हा व मुझे चीज मिल जाए  !

तो इस वजह से  गांव में खाने का अभाव बहुत ज्यादा था इसलिए मैंने खाने पर ज्यादा ध्यान दिया इंस्टेड ऑफ माय मिशन फ मैम ने मुझे समझा कि खाना तुम्हें मिल जाएगा लेकिन पहले तुम्हें अपने मिशन पर ध्यान देना है ।

मैम ने मुझे मोटिवेट किया काफी और उन्होंने काफी सारी क्लासेस भी लगवाई  सिंगिंग की क्लासेस इंग्लिश स्पोकन की क्लासेस और पर्सनालिटी डेवलपमेंट की क्लासेस अब पर्सनालिटी डेवलपमेंट की क्लासेस इसलिए लगवाई क्योंकि मेरा बोलचाल का तरीका बॉडी लैंग्वेज खाना पीना मैं कैसे खाती थी !

पहले स्टार्टिंग में मैं सान के खाती थी तो एक दिन क्या हुआ स्टार्टिंग में मैम ने मुझसे पूछा कि सब्जी रोटी खाना है मैंने सिर नीचे करके कहा हम सिर्फ दाल चावल खाते हैं आई लिटरली यूज टू स्पीक लाइक दिस तो मैम ने उसके लिए काफी सारे मेरे इंप्रूवमेंट्स करवाए मेरे बहुत सारी इंप्रूवमेंट्स करवाई मेरे बॉडी लैंग्वेज में बोलचाल का तरीका और सिंगिंग की क्लासेस इसलिए लगवाई क्योंकि पहले मेरी आवाज में बहुत हाश थी !

क्योंकि मैं गांव की खड़ी भाषा बोलती थी और गांव में क्या होता है ना कि लोग ज्यादा चिल्लाते ही रहते हैं तो चिल्लाने की वजह से मेरा गला थो होश हो गया था उस वजह से मैम ने सिंगिंग की क्लासेस लगवाई इंग्लिश स्पोकन की जिससे मेरी इंग्लिश में सीखू  !

थोड़ी बहुत और उनकी बेटी भी है खुशी दीदी जिन्होंने मुझे बहुत हेल्प की इंग्लिश को इंप्रूव करने में काफी सपोर्ट मिला मुझे डांस की क्लासेस भी लगवाई पढ़ाई की भी क्लासेस लगवाई अब आप लोगों को लग रहा होगा !

इस लड़की की लाइफ तो सेटल हो गई बिल्कुल सब बढ़िया है लेकिन कहते हैं ना जिंदगी में उतार चढ़ाव आना जरूरी होता है और उस दिन मेरी जिंदगी में उतार आया था उस दिन मेरी मम्मी का कॉल आया मैम के पास और उन्होंने घर घबराती हुई आवाज में बोला कि भूमिका जल्दी से घर आ जाओ पापा की तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं है !

मैम ने कहा यह बहुत सीरियस मैटर है तुम्हें चलना चाहिए मैं वहां पर गई मैंने देखा कि पापा जो है बिल्कुल भी हिल नहीं पा रहे थे मुझे बस देखे जा रहे थे उनकी आंखों से आंसू टपक रहे थे बस और उस समय मेरा शरीर जैसे एक सेकंड के लिए जमसा गया था बिल्कुल मेरे भाई भी रो रहे थे मेरी मम्मी भी रो रही थी !

उसम मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था और मैंने उस समय सोचा जिंदगी का सबसे पहला सबसे टफ मुझे डिसीजन लेना था उस समय मैंने सोचा कि अब तो मुझे गांव में ही रहना है मैं सपना तो पूरा कर ही नहीं सकते क्योंकि मेरे लिए परिवार पहले आता है ।

और सपना बाद में तो मैंने मैम से कहा कि मैम आप जाइए और मुझे उनके साथ अपने सारे सपने भी जाते हुए देख रहे थे जो मैंने बनाए थे और मैम ने मेरे साथ बनाए थे काफी टफ डिसीजन था मेरे लिए वह मैंने वही ताने सुनना शुरू कर दिए कि अगर पहला बच्चा लड़का हो जाता तो कम से कम दो पैसे तो कमा लेता खेती करके क्योंकि उस समय जमीन बकुल बंजर पड़ी हुई थी।

और मुझे वह सब कुछ सच लग रहा था क्योंकि मेरे आंखों के सामने मेरे घर का राशन खत्म हो रहा था और उस समय एक दिन क्या हुआ मेरा भाई सबसे छोटा भाई मेरे पास आया और मुझसे कहा दीदी खाना दे दो अब मैं उसे कैसे बताऊं ।

घर में खाना है नहीं मैं उसके सामने रो भी नहीं सकती और ना ही उसे मैं यह बात समझा सकती हूं कि अभी हालात क्या चल रहे हैं हालात बिल्कुल फर्स्ट हो गए थे क्योंकि पहले तो मम्मी बीमार थी अब मेरे पापा भी बीमार हो चुके थे दोनों लोग बेड पर थे  !

उस समय मुझे पता चला कि पापा को पैरालिसिस का अटैक पड़ा था मुझे तो वो चीज मैंने कभी सुनी नहीं थी मेरे लिए बहुत शॉकिंग चीज थी क्योंकि मैंने पापा को हमेशा काम करते हुए देखा है और हमेशा चलते फिरते हुए देखा अभी भी बैठे हुए नहीं देखा ।

मैंने उनको लेकिन एक दिन क्या हुआ मैंने अपने पड़ोस के दोस्त को देखा कि वह फूल माला बना रही थी तो मैं उसके पास गई मैंने उससे पूछा कि तुम यह फूल कहां से लाई हो !

उसने बताया कि बाजार में फूलमाला की दुकान है तो मैं बाजार में गई फूलमाला के दुकान पर फूल पत्ती की दुकान पे तो मैंने वहां से मैंने उनसे कहा कि चाचा तुम हम फूल दे दो तुम्हें जितने पैसे देना हम ले लेंगे उन्होंने मुझे कुछ फूल दिए और मुझसे कहा कि तुम्हे इनकी तीन माला बना बनानी है !

मैंने शाम का सारा काम खत्म करके तीन फूल माला बनाई और आप गेस करिए कि मुझे कितने पैसे मिले उसके वह पहली कमाई मेरे लिए बहुत बड़ी चीज थी कि मुझे लग रहा था कि अब मैं कुछ सही कर सकते हूं परिवार में जो मुझे पैसे मिले सबसे पहले मैंने अपने दोनों भाइयों के लिए कंपट खरीदी एक की चार आती दो रुपए मैंने खर्च कर दिए अब जो रुपए बचे थे ।

उसमें बहुत थोड़ी सब्जी आती थी जितनी भी आई मैं वो लेकर आई बाजार से और पड़ोसी के घर से भी थो सब्जी ले ली मैंने कहा कि मैं आपको बाद में दे दूंगी फिर मैंने उस दिन खाना बनाया मुझे बहुत खुशी मिली कि मुझे सुधार दिख रहा था ।

अपनी फैमिली में कि अब मैं कुछ कर सकती हूं अपनी फैमिली के लिए ऐसे करते करते वहां पर छ महीने रहे और फिर पापा ने पापा की जितनी भी सेविंग थी बहुत कम सेविंग थी और मम्मी की वो पतली सोने की चोरिया जिनकी खनक सुनके मैं बड़ी हुई थी वो मेरे सामने बिक गई थी ।

बिल्कुल और मेरे लिए वह सीन जो था बहुत शॉकिंग था क्योंकि मम्मी चूड़ियां मैंने बचपन से देखी है मेरे सामने बिक रही थी वो तो पापा की जितनी सेविंग्स थी मम्मी की जो चूड़ियां बिकी थी उनसे जितने भी पैसे आए उनसे हम लोग ने दुकान खुली किराने की बहुत छोटी सी और उससे जितना भी पैसा आ रहा था ।

रुपए आ रहे थे जितने भी वह पापा के दवाइयों में खर्च हो रहे थे और घर के खर्च में खर्च हो रहे थे तो धीरे-धीरे उन दवाइयों से मेरे पापा की तबीयत में थोड़ा सा इंप्रूव हुई उनकी तबीयत तो वो थोड़ी सी लड़खड़ाते आवाज में बोलने लगे थे अब मैं वहां प छ महीने रही एक दिन क्या हुआ पापा ने मुझे अपने पास बुलाया अपनी लड़ खरात आवाज में कहा वही क्वेश्चन जो उन्होंने  दस महीने पहले पूछा था रे चरैया तो मैं डांसर नहीं बनने और जो मैंने कहा था कि मैं व उस समय शांत रही थी ।

इस इस बार मैंने बोला कि मुझे बनना है पापा फिर पापा ने कहा कि यहां तो तुम कुछ भी नहीं बन पाओगी क्योंकि यहां पर गांव में अपॉर्चुनिटी है ही नहीं तो अगर तुम्हें कुछ बनना है अपना सपना पूरा करना है मैम के पास वापस जाना पड़ेगा मैंने बिल्कुल मना कर दिया क्योंकि मुझे लग रहा था कि फिर से कोई घटना ना हो जाए दोबारा फिर से बुरा वक्त ना आ जाए ।

वो लेकिन फिर मेरा भाई आया मेरे पास और उसने मुझसे कहा कि जब तुम छ साल की थी तो तुमने सब कुछ संभाल लिया तो मैं क्यों नहीं संभाल सकता हूं तो मुझे मोटिवेशन मिला कि मेरा मेरी पूरी फैमिली मुझे सपोर्ट कर रही थी तो मैं पड़ोस के घर पर जाकर मैम को मैंने मैम को कॉल किया और मैंने मैम से कहा कि मैम मुझे अपना डांस फिर से शुरू करना है।

अपना सपना फिर से फिर से देखना है वो सपना जो मैंने बनाया था आपके साथ मैम ने फिर से मेरी एक बार हेल्प की उन्होंने मुझे दोबारा हैदराबाद बुलाया जब मैं गांव से हैदराबाद आई तो मेरी मुश्किलें तो कम हो गई थी लेकिन मैम की मुश्किलें बढ़ चुकी थी क्योंकि उन्हें लोगों के ताने सुनने पड़ रहे थे कि तुम्हारी खुद की बेटी उस परे ध्यान दो दूसरों का बच्चा पालना बहुत मुश्किल है ।

अपनी बेटी को कुछ बनाओ लेकिन मैम ने उन सब चीजों को साइड रख के मेरे साथ हर मुश्किल में डट के मेरा मेरा साथ दिया तो शुरुआत में तुम मुझे परिवार की बहुत याद आती थी और मुझे डिमोटिवेट भी फील होता था कभी-कभी और इंफिनिटी होता था कभी क्योंकि जब मैं स्कूल में एडमिशन लेने गई तो मुझे लगा कि मैं कैसे कोप अप करूंगी सब बच्चों के साथ फिर मैम ने मुझे जो स्टॉक्स का वीडियो दिखाया मुझे आज तक वो याद है।

उस समय मैं थी 9 साल की और अभी हूं मैं 12 साल की वही समझदारी उस समय भी थी इस समय भी है लब मैं 9 साल में काफी समझदार थी उसमें मैंने एक मैम थी जो आईएएस है ईरा सिंघल मैम है जो उनकी जो टॉक मैंने देखी उससे मुझे सीखने को मिला कि जिंदगी में स्ट्रगल्स कितने भी हो लेकिन अगर आप उस स्ट्रगल का डट के सामना करते हैं तो आपको सक्सेस पाने से कोई रोक नहीं सकता है मैंने वही सीखा उनसे मुझे मोटिवेशन मिला फिर मैम ने मुझसे कहा कि तुम कर सकती हो।

और लोग तुम्हें कुछ भी कहे लेकिन तुम्हें अपने काम पर ध्यान देना है क्योंकि अगर तुम कुछ बन गई ना तो यही लोग तुम्हारे पास आएंगे तुम्हें प्यार देंगे और तुम्हारी तारीफ करेंगे मैंने मैंने मैम की बात सुनी और अपने काम पे फोकस किया।

पढ़ाई पे फोकस किया तो एक बार वह मेरे पास आई और मुझसे कहा कि चलो भूमिका कुछ डांस के वीडियोस बनाते हैं एक्टिंग के कुछ वीडियोस बनाते हैं अब डांस का तो मुझे शौक शुरुआत से ही था लेकिन अब एक्टिंग का भी थोड़ा सा डेवलप हो रहा था तो हम लोगों ने वीडियोस बनाए शुरुआत में तो फोन से बनाए थे ।

उससे कोई सक्सेस मिल नहीं रही थी ना व्यूज ना लाइक्स फिर मैम ने सोचा कैसे नहीं आ रहा है फिर मैम ने क्या किया प्रोफेशनल कैमरे से भी वीडियोस बनवाए और उससे भी कोई सक्सेस नहीं मतलब कि इससे  कोई फायदा हो ही नहीं रहा था कुछ फायदा नहीं हो रहा था ।

लेकिन हमने कभी हार नहीं मानी हम लोग वीडियोस डालते गए डेली हार्ड वर्क किया मैम अपने कैमरे पर हार्ड वर्क कर रही थी मैं अपने डांस प हार्ड वर्क कर रही थी कभी-कभी तो वीडियो प बहुत ही कम व्यूज आते थे लेकिन फिर भी हम लोग अपना काम पर ध्यान देते थे डेली व्यू डेली वीडियोस बनाते थे तो एक बार मैं स्कूल जाने के लिए सुबह उठी मैम ने मुझे बताया कि तुम्हारा एक वीडियो रातों रात वायरल हो गया है ।

और उन्होंने बताया कि यह वीडियो श्रीदवी मैम का था कि डायलॉग था तो मैं उससे बहुत ही ज्यादा मोटिवेट हुई फिर मैंने और भी ज्यादा उनके डांस के वीडियोस और श्रीदेवी मैम के और एक्टिंग की वीडियोस बनाना शुरू कर दी और उसकी वजह से मुझे बहुत सारे व्यूज मिलने लगे लाइक्स मिलने लगे और काफी सेलिब्रिटीज तक भी जाने लगे और फिर सब लोगों के प्यार की वजह से और मेरे सपोर्टर की वजह से आज मुझे लोग 18 लाख से भी ज्यादा जानते हैं ।

और 6 करोड़ से भी ज्यादा महीने में मेरे व्यूज जाते हैं वीडियो पे सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी लोग मेरे डांस को देखते हैं और उसे अप्रिशिएट करते हैं यह थी मेरी एक छोटी सी कहानी क्योंकि मैं खुद छोटी हूं लेकिन मेरे सपने बड़े हैं और उन बड़े सपनों में से एक था कि मैं अपने परिवार को सपोर्ट करूं फाइनेंशियली ईएक्सप्रेस छोटे से गांव से आई हूं।

जहां कोई मुझे जानता ही नहीं था और आज मुझे इतने सारे लोग जान रहे हैं मेरे लिए बहुत बड़ी बात है पहली बार मेरे पास जोक स्टॉक्स का इन्विटेशन आया था तो पहले तो मुझे विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि जो स्टॉ ऐसा प्लेटफार्म है जहां पे लाखों लोग आते हैं अपनी कहानी सुनाते लोगों को मोटिवेट करते हैं ।

जिनसे मैं भी मोटिवेट हुई थी तो ये मेरे लिए बहुत ही बड़ी बात थी और ये मेरे लिए एक सपना सपने की तरह था क्योंकि मैंने भी मोटिवेशनल की बहुत सारी कहानियां देखी थी  और उसे कर लोग मोटिवेट होते हैं मेरी तो बहुत बड़ी बात थी यह और आज मैं जो स्टॉक्स के प्लेटफार्म पर खड़ी हूं और मैं इस चीज प प्राउड हूं बस लास्ट में यह चीज कहना चाहूंगी ।

अगर मैं कर सकती हूं तो आप भी कर सकते हैं थैंक यू

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले 12 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी, नीतीश कुमार ने किया ऐलान

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के 34 लाख लोगों को नौकरी और रोजगार मिलेगा. उन्होंने रविवार को गया के बेलागंज और इमामगंज में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए यह बयान दिया. नीतीश कुमार ने कहा कि 2020 में उन्होंने 10 लाख नौकरियों का वादा किया था, जिसमें से 7 लाख 17 हजार लोगों को नौकरी मिल गई है. उन्होंने आगे कहा कि 2025 के चुनाव से पहले 12 लाख लोगों को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी. इसके अलावा नीतीश कुमार ने कहा कि अब तक 24 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा चुका है.

नीतीश कुमार ने अपनी रैलियों में 2005 से अब तक राज्य में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2005 से पहले लोगों का शाम के बाद घर से निकलना मुश्किल था. हिंदू-मुस्लिम के नाम पर झगड़े होते थे. बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की हालत कितनी खराब थी. इसे मत भूलिए. नीतीश कुमार ने जोर देकर कहा कि अब हिंदू-मुसलमानों के बीच कोई झगड़ा नहीं है। उन्होंने 8 हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी की है और 60 साल से अधिक पुराने मंदिरों की घेराबंदी का काम भी शुरू हो गया है।

नीतीश कुमार ने कहा कि मदरसों को सरकारी मान्यता दी गई है और पुलिस में महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण लागू किया गया है। इसके कारण बिहार में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेलागंज में जदयू प्रत्याशी मनोरमा देवी और इमामगंज से हम प्रत्याशी दीपा मांझी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे।

क्या आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं? लोन लेने से पहले 20/4/10 का नियम जरूर जान लें, फायदे में रहेंगे

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कार खरीदते समय आपको कम से कम 20 प्रतिशत या उससे अधिक रकम डाउन पेमेंट के तौर पर देनी चाहिए। अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो नियम की पहली शर्त पूरी हो जाती है।

क्या आप जानते हैं कि कार एक घटती संपत्ति है। अगर आप कार का कमर्शियल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो समय के साथ इसकी कीमत घटती जाती है। जैसे ही नई कार शोरूम से निकलकर सड़क पर आती है, इसकी कीमत कम होने लगती है। ऐसे में कार लोन कम से कम अवधि का होना चाहिए। अलग-अलग बैंक अपने ग्राहकों को कार लोन पर खास ऑफर दे रहे हैं। ऐसे में लोन लेने से पहले इन ऑफर की तुलना करें और जहां से सबसे किफायती लगे, वहां से लोन लें। अगर आप कार लोन लेने जा रहे हैं तो आपको 20/4/10 के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं क्या है यह नियम और इसके क्या फायदे हैं।

क्या है 20/4/10 का नियम?

कार लोन लेते समय 20/4/10 नियम बहुत काम आता है। यह नियम ग्राहक को बताता है कि उसे कितना और कितने समय के लिए कार लोन लेना चाहिए। यह नियम ग्राहक की आर्थिक स्थिति के हिसाब से जवाब देता है। इस नियम के अनुसार, आप कार तभी खरीद सकते हैं, जब आप ये तीन ज़रूरतें पूरी कर रहे हों:

20/4/10 नियम के अनुसार, कार खरीदते समय आपको कम से कम 20 प्रतिशत या उससे ज़्यादा रकम डाउन पेमेंट के तौर पर देनी चाहिए। अगर आप ऐसा कर पाते हैं, तो नियम की पहली ज़रूरत पूरी हो जाती है।

20/4/10 नियम कहता है कि ग्राहकों को 4 साल या उससे कम अवधि के लिए कार लोन लेना चाहिए। यानी लोन की अधिकतम अवधि 4 साल होनी चाहिए। इस तरह आपको वही कार खरीदनी चाहिए, जिसका लोन आप 4 साल के अंदर चुका सकें।

20/4/10 नियम कहता है कि आपका कुल ट्रांसपोर्टेशन खर्च (कार EMI समेत) आपकी मासिक सैलरी के 10 प्रतिशत से कम होना चाहिए। EMI के अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च में ईंधन और मेंटेनेंस खर्च भी शामिल होता है। अब आपको वही कार खरीदनी चाहिए जिसमें आप इन तीनों जरूरतों को पूरा कर सकें।

ज्यादा डाउन पेमेंट करें

अगर आप कार खरीदने जा रहे हैं तो कुछ बातों पर जरूर गौर करें, जैसे- जितना हो सके उतना डाउन पेमेंट करें। अपग्रेडेड मॉडल खरीदने की बजाय आप कार का बेस मॉडल खरीद सकते हैं, क्योंकि यह आपके लिए सस्ता रहेगा। पिछले साल की बची हुई नई कार इनवेंटरी पर गौर करें, यह आपके लिए सस्ता रहेगा। अपनी मौजूदा कार को लंबे समय तक अपने पास रखें और नई कार के लिए बचत करें। नई कार खरीदने की बजाय आप पुरानी कार भी खरीद सकते हैं।

बिहार के छात्र का शव राजस्थान में कुएं में मिला, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

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सहरसा: बिहार के सहरसा निवासी बी-फार्मा के छात्र का शव राजस्थान में मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है। कॉलेज से पांच सौ गज की दूरी पर स्थित कुएं से छात्र का शव बरामद होने के बाद परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं।

दरअसल, सदर थाना क्षेत्र के शिवपुरी निवासी प्रभाष कुमार पोद्दार के 19 वर्षीय पुत्र निर्भय राज का शव कॉलेज से पांच सौ गज की दूरी पर स्थित कुएं में मिलने से सनसनी फैल गई है। सहरसा निवासी निर्भय राज मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार चित्तौड़गढ़ राजस्थान का बी फार्मा का छात्र था। छात्र की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में मातम छा गया।

छात्र के पिता प्रभाष कुमार पोद्दार ने बताया कि अगस्त 2024 में कॉलेज में एडमिशन लेने के बाद वह हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। 10 नवंबर को सुबह 7 बजे मेरे मोबाइल पर हॉस्टल वार्डन का फोन आया कि आपका बेटा हॉस्टल से गायब है। हम अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं, जबकि निर्भय ने उससे पहले अपनी मां और मौसी से फोन पर बात की थी। उसके बाद बताया गया कि उसका शव कुएं में मिला है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा हॉस्टल से कैसे बाहर गया, यह जांच का विषय है, जबकि किसी को भी बाहर जाने की इजाजत नहीं है।

उन्होंने कहा कि निर्भय की हत्या सोची समझी साजिश के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि वे खुद कॉलेज और हॉस्टल गए हैं। आखिर कहा जा रहा है कि वह रात 10 बजे से हॉस्टल से गायब है, लेकिन किसी को भी हॉस्टल से बाहर जाने की इजाजत नहीं है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सरकार से मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

‘चुपचाप सुनो अब, ज्यादा मत बोलो…’, जानिए मंच से किस पर भड़के नीतीश कुमार? 

नीतीश के गलती वाले बयान पर मीसा भारती बोलीं, उन्हें बार-बार गलतियां करते रहना चाहिए, ताकि बिहार की जनता…

 

‘चुपचाप सुनो अब, ज्यादा मत बोलो…’, जानिए मंच से किस पर भड़के नीतीश कुमार?

गया: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज रविवार को गया के इमामगंज में चुनाव प्रचार करने पहुंचे. यहां से उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान जब नीतीश कुमार मंच से अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे, तो सभा में मौजूद जीविका दीदियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. इस पर नीतीश कुमार भड़क गए और उन्हें चुप रहने को कहा.

दरअसल, सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी रविवार को एनडीए की हम प्रत्याशी दीपा मांझी के समर्थन में गया के इमामगंज के जमुना टांड मैदान पहुंचे थे. जहां चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे. नीतीश कुमार के भाषण के दौरान जीविका दीदियां अपनी मांगों को लेकर शोर मचा रही थीं. जीविका दीदी अपने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर बोलने लगीं. तभी नीतीश कुमार ने कहा, ‘चुपचाप सुनो अब, हम आपकी बात सुनेंगे, ज्यादा मत बोलो.’ उस पर जवाब देते हुए सीएम नीतीश कुमार ने मंच से जीविका दीदियों से कहा कि सुनिए, पहले कितने कम स्वयं सहायता समूह थे.

मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों से कहा कि सुनिए, पहले कितने कम स्वयं सहायता समूह थे. 2006 में कर्ज लेकर जीविका की स्वयं सहायता को बढ़ाया. पहले केंद्र सरकार जीविका दीदी से नाराज थी. उन लोगों ने आजीविका को देखा और किया है. 1 करोड़ 31 लाख जीविका दीदियां हैं. अब शहरी इलाकों में भी ऐसा होगा. पंचायती राज में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया. पुलिस में 35% आरक्षण दिया गया. यह सिर्फ बिहार में सबसे ज्यादा आरक्षण है. अगले चुनाव से पहले 12 लाख लोगों को नौकरी मिलेगी.

नीतीश के गलती वाले बयान पर मीसा भारती बोलीं, उन्हें बार-बार गलतियां करते रहना चाहिए, ताकि बिहार की जनता… 

अगर Ratan Tata ना होते तो Tata Group नहीं होता । Biography of Ratan Tata । Case Study

नीतीश के गलती वाले बयान पर मीसा भारती बोलीं, उन्हें बार-बार गलतियां करते रहना चाहिए, ताकि बिहार की जनता…

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राजद के साथ जाने की गलती न करने संबंधी दिए गए बयान पर राजद सांसद डॉ. मीसा भारती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह गलती एक-दो बार नहीं, बल्कि बार-बार करते रहना चाहिए, ताकि बिहार की जनता का भला हो और उन्हें रोजगार मिल सके। मीसा भारती ने शनिवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तेजस्वी राज्य सरकार में मुख्यमंत्री के साथ थे, तब बिहार में लाखों लोगों को नौकरी मिली, यह एक गलती की वजह से संभव हुआ।

साथ ही गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान पर कि कांग्रेस और विपक्ष के लोग ओबीसी को एकजुट नहीं होने देना चाहते। मीसा भारती ने कहा कि हमने जातिगत जनगणना कराई, आरक्षण भी बढ़ाया, इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कौन गया?

आपको बता दें कि शनिवार को आरा के तरारी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश ने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने ही मुझे बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था। जब वे केंद्र में मंत्री थे, तब उन्होंने मेरा बहुत सम्मान किया. तब से हम बिहार के विकास के लिए भाजपा के साथ काम कर रहे हैं. हमसे दो बार गलती हुई. हमने गलत लोगों के साथ काम किया. बाद में हमें पता चला कि वे सब गड़बड़ कर देते हैं, इसलिए हमने कल फैसला किया कि हम किसी भी तरह से कोई दाएं-बाएं नहीं करेंगे. भाजपा के साथ हमारा जो रिश्ता शुरू से है, वैसा ही रहेगा.

नीतीश कुमार के इस बयान पर मीसा भारती ने पलटवार किया है. और कहा कि मुख्यमंत्री को यह गलती एक-दो बार नहीं बल्कि बार-बार करते रहना चाहिए, ताकि इसका फायदा बिहार की जनता को हो और उन्हें रोजगार मिल सके. दरअसल, नेता प्रतिपक्ष और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव जनसभाओं में यह कहने से नहीं चूकते कि 17 महीने की महागठबंधन सरकार में ही शिक्षकों को नौकरी और युवाओं को रोजगार मिला. जब वे सरकार में उपमुख्यमंत्री थे.

अगर Ratan Tata ना होते तो Tata Group नहीं होता । Biography of Ratan Tata । Case Study 

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मिस्टर रतन टाटा एक नाम जो भारत की आन बान शान और बिजनेस का भगवान है बाकी बिजनेसमैन ने बिजनेस किया ये देख के कि कौन सा सेक्टर अच्छा कौन सा प्रोडक्ट अच्छा किसमें माल बनेगा किसमें पैसा बनेगा रतन टाटरी जी ने बिजनेस किया ये सोच के ऐसा क्या काम करूं जिसकी देश को जरूरत है कौन सा प्रोडक्ट कौन सी इंडस्ट्री में जाऊं जिससे देश का भला हो बाकी बिजनेसमैन अपना बैंक बैलेंस और नेटवर्थ बढ़ाने की रेस में रहे और रतन टाटा जी रहे भारत का मान सम्मान बढ़ाने की रेस में आज की article श्री रतन टाटा जी को समर्पित है !

जो कि उन्होंने भारत के बिजनेस जगत में और समाज में किया रतन टाटा जी ग्रुप के चेयरमैन बने 1991 में तब टाटा ग्रुप के पास टोटल 95 कंपनियां थी और हर कंपनी अलग-अलग सेक्टर में काम कर रही थी इनमें कोई एकता नहीं थी सब अपनी-अपनी धुन में चल रहे थे कोई सेंट्रल अथॉरिटी नहीं थी और पूरा फोकस इंडियन मार्केट पे था बाहर कोई ध्यान नहीं दे रहा था ग्रुप का रेवेन्यू मात्र 000 करोड़ और मार्केट कैपिला मात्र 0000 करोड़ फिर रतन टाटा जी जब सीन में एंटर हुए और 2012 में रिटायर हुए तब तक वो क्या कर चुके थे!

ये सुनिए जो टाटा ग्रुप की छोटी-छोटी कमियां थी अपनी मनमानी कर रही थी सबको एक करके सेंट्रलाइज कर दिया जहां फोकस सिर्फ इंडियन मार्केट पे था फॉरेन मार्केट पे फोकस किया और आज टा ग्रुप का 60 पर रेवेन्यू विदेशों से आता है टाटा ग्रुप ब्रिटेन का सबसे बड़ा एंप्लॉयर है !

यानी वो देश जिसने कभी भारत पे राज किया था वहां पे हम राज कर रहे हैं सबसे ज्यादा नौकरियां हम देते हैं रजन टाटा जी के पीछे ब्रिटेन के बड़े-बड़े ब्रांड चाहे वो टेटली हो चाहे जगवार हो चाहे लैंडरोवर हो चाहे कोरस हो सब खरीद डाला देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी टीसीएस उन्हीं की निगरानी में लिस्ट हुई थी जब उन्होंने जॉइन किया सेल थी मात्र 14000 करोड़ जब वो रिटायर हुए तो सेल कर गए थे 5वा लाख करोड़ जब उन्होंने जॉइन किया मार्केट कैप 30000 करोड़ था आज की रेट में टाटा ग्रुप देश का सबसे बड़ा ग्रुप है 25 लाख करोड़ मार्केट कैप के साथ पर उन्होंने ये किया कैसे उनकी क्या लीगेसी रही इंडिया और वर्ल्ड में और ये तो रही बिजनेस की बात बिजनेस के अलावा पर्सनल जिंदगी में कैसे थी उससे रिलेटेड कुछ किस्से कुछ कहानियां जो चैरिटी करते थे जो हंबल थे उसके किस्से सुनेंगे इस वीडियो में अगर आप श्री रतन टाटा जी से प्यार करते हैं उनका सम्मान करते हैं तो इस वीडियो को लाइक जरूर करना क्योंकि मैं चाहता हूं कि रतन टाटा जी आज हमारे बीच जब नहीं रहे और उन परे मैं एक वीडियो कर रहा
हूं !

अगर Ratan Tata ना होते तो Tata Group नहीं होता । Biography of Ratan Tata । Case Study

भारत के सबसे महान व्यक्तित्व के जीवनी की शुरुआत कि कौन-कौन से इंपॉर्टेंट पल में क्या-क्या चीजें हुई रतन टाटा जी का जन्म हुआ था 1937 में उनके माता-पिता के बीच में भाई साहब डिवोर्स हो गया तो उनको अपना बचपन दादी के साथ बिताना पड़ा 1955 में मात्र 17 साल की उम्र में वो यूएस चले गए कॉर्नेल यूनिवर्सिटी पढ़ने के लिए 1962 में उनकी ग्रेजुएशन डिग्री पूरी हुई आर्किटेक्ट की रतन टाटा जी डिग्री से एक आर्किटेक्ट थे उस समय उनका मन था कि यार यूएस की लाइफ स्टाइल ठीक है वहीं सेटल हो जाते हैं लेकिन दादी ने उनको बचपन से पाला था दादी की तबीयत खराब हुई दादी ने पुकारा एक बार में चले आए अब ऑडियंस को मैं बता दूं ऐसा नहीं था कि रतन टाटा जी में जो जेआरडी टाटा है उनके ब्लड रिलेशन में थे या उनको पता था कि यार टाटा ग्रुप का जो उत्तराधिकारी मैं ही हूं मैं ही राजकुमार हूं नहीं और उन्होंने ऐसा करने का क्लेम भी नहीं किया उन्होंने अपने हिसाब से अपना काम कर रहे थे !

आईबीएम से उनको ऑफर मिला और वो आईबीएम में नौकरी करने की सोच रहे थे जेआरडी टाटा की मानता थी उन्होंने कहा नहीं यार तुम तो उस टाटा ग्रुप से कहीं ना कहीं जुड़े हुए हो प्लीज जॉइन और टा जब तक इंडिया में रहोगे टाटा ग्रुप में ही काम करोगे 1963 में जब वो 26 साल की उम्र थे विधिवत रूप से टा ग्रुप में एंट्री की तो सबसे पहले टा ग्रुप में जब एंटर हुए छ महीना उन्होंने टाटा मोटर में ट्रेनिंग की उसके बाद चले गए टेस्को जो आज की डेट में टाटा स्टील नाम से जानी जाती है छ महीना वहां ट्रेनिंग की ट्रेनिंग के बाद वहीं टाटा स्टील में एक टेक्निकल ऑफिसर की हैसियत से उन्होंने जॉइन किया काम चालू किया 1969 में 4 साल बाद वो ऑस्ट्रेलिया चले गए ग्रुप का रिप्रेजेंट करने कि टाटा ग्रुप का एक मेंबर चाहिए था तो ऑस्ट्रेलिया गए और टाटा ग्रुप का प्रतिनिधित्व किया 1970 में कुछ समय के लिए उन्होंने टीसीएस में भी काम किया था 1971 में उनको नेल्को का डायरेक्टर बनाया गया नेल को एक तरह की लॉस मेकिंग फर्म थी!

और टाटा ग्रुप ने उम्मीद छोड़ दी थी कि इसमें कुछ हो सकता है पर रतन टाटा जी ने उसको भी ट्रांसफॉर्म किया और कंपनी को बदल दिया और वहां जेआरटी टाटा को दिखा अरे यार इस लड़के में कुछ बात है लको की सफलता के बाद 1971 में टा s जो उनकी प्राइमरी कंपनी है उसमें इनको डायरेक्टर बनाया गया 1975 में ने हावर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट का प्रोग्राम किया 1981 में बने टाटा इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर और वहां पे इन्होंने क्या किया t टा ग्रुप का जो थिंक टैंक है जो प्लान करता है कि अब किस नए सेक्टर में आना अब क्या करना चाहिए और हाईटेक बिजनेस में घुसना इन्होंने नीव रखी थी

उसकी 1981 में 1983 में इन्होंने लॉन्च किया टाटा सल्ट जो देश का नमक है वो देश के हमारे लाल ने ही नॉज किया था 1986 में एयर इंडिया के चेयरमैन बने कुछ समय के लिए और फाइनली 25 मार्च 1991 को इनको टाटा ग्रुप के अधिकृत रूप से चेयरमैन बन गए और ये डेट मुझे बहुत अच्छी लगी क्योंकि 24 मार्च को मेरा भी बर्थडे है यानी जब मैं 2 साल एक दिन का था तब रतन टाटा जी टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने थे एक कोइंसिडेंस बताता हूं इसी के 10 दिन बाद 4 अप्रैल 1991 को आनंद महिंद्रा जी महिंद्रा ग्रुप में एंटर हुए थे अब आप बोलेंगे राहुल जी देखो राज गद्दी पे बैठ गए राजकुमार सर जी 1991 इस पीरियड को समझना इंटरनल एक्सटर्नल दोनों तरफ हाहाकार मचा हुआ था

सबसे पहले बात करते हैं एक्सटर्नल हाहाकार की एक्सटर्नल मतलब उस समय देश की इकोनॉमी खुली थी देखो 91 के पहले देश की इकॉनमी बंद थी तो क्या था लाइसेंस राज था कि अच्छा हर टक बनाने का हर कंपनी को लाइसेंस मिला हुआ था कि अच्छा यह आदमी यह बनाएगा ये आदमी ये बनाएगा कुछ भी बना ले कैसा भी बना ले किसी भी रेट प बेचे माल तो बिक ही रहा था तो उस समय टेंशन नहीं थी कंपटीशन नहीं था और सब अपना काम राजी कुशी कर रहे थे 1991 में जब अर्थव्यवस्था खुल गई तो विदेशी कॉम्पिटेटिव के पहले जितने भी पुराने group

इसलिए सुन रहे हो ग्रुप का इसलिए सुन रहे हो बजज ग्रुप का इसलिए सुन रहे हो क्योंकि इन चार के जो लीडर थे विजनरी थे इन्होंने ग्रुप को संभाल लिया उस समय 91 के पहले इनके आसपास की जो थे सब चले गए काल के काल में तो इन चार लीडर ने देश को संभाल लिया ये तो था एक्सटर्नल क्योंकि उस समय विदेशी कंपनियों से भी लड़ना था और बाकी सब से भी लड़ना था और मैदान खुल गया था इंटरनल चैलेंज तो और खतरनाक था इंटरनल चैलेंज ये था कि साहब उस समय टाटा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियां थी 95 कंपनियां मैंने आपको बताया हर कंपनी में एक ना एक ऐसा बंदा बैठा था !

जो उस कंपनी को अपने हिसाब से चला रहा था टाटा ग्रुप से कोई लेना देना नहीं था क्योंकि इनके पहले जो बॉस थे वो थे जेआरडी टाटा जेआरडी टाटा का व्यक्तित्व इतना भारी था कि उनकी आवाज में दम था एक बार फोन लगा दिया एक बार बात कह दी तो आदमी इधर-उधर हिल नहीं सकता था लेकिन जब वो चेयरमैन रह रहे तो हर आदमी अपनी-अपनी मनमानी करने लग गया जब रतन टाटा जी भी बने तो एक रूसी मोदी करके थे उनका मानना था कि शायद वो चेयरमैन बनते तो उन्होंने बहुत ज्यादा विद्रोह कर दिया तो इंटरनली इनको विद्रोह का सामना करना पड़ा!

अगर Ratan Tata ना होते तो Tata Group नहीं होता । Biography of Ratan Tata । Case Study

 

इन्होंने इस विद्रोह को पूरा कंट्रोल करते हुए पुराने जो व्यक्ति इस तरह की मन तानाशाही कर रहे थे उनको सबको हटाया रिटायरमेंट की एज नहीं थी कोई भी आदमी जब तक जिंदा है तब तक काम कर रहा था रिटायरमेंट की एज डाली नए टैलेंट के लिए जगह बनाई बाकी सब ग्रुप की कंपनीज में अपने हल्के हल्के स्टेक्स बढ़ाए और टाटा सस जो उसकी चेयरमैन कंपनी थी उसका दबदबा बढ़ाया ताकि कोई कंपनी इधर-उधर ना निकले अगर रतन टाटा जी 1991 में जवाइन नहीं करते 2000 तक आते-आते टाटा ग्रुप की 20-30 कंपनियां अलग-अलग डायरेक्शन में चली जाती !

बिना टाटा ग्रुप के कंट्रोल के उस समय जितनी भी कंपनिया थी सबका फोकस ये था इंडिया में काम करो इंडिया में काम करो इन्होंने कहा रे वई इंडिया इंडिया में तो काम करना है पर पर इंडियन कंपनी बाहर जाके अपना डंका कैसे बजाए गी उस परे इन्होंने प्रयास चालू किया और शुरुआत की सन 2000 से सन 2000 में इन्होंने टेटली जो कि एक ब्रिटिश ब्रांड था उसको खरीद लिया तहलका मच गया पूरे भारत में और विश्व में कि एक इंडियन कंपनी बाहर जाके विदेशी कंपनी को खरीद ली वो भी खुद से बड़ी टाटी ने खरीदा टाटी छोटी कंपनी थी

टेटली बड़ी कंपनी थी तो छोटी कंपनी ने बड़ी कंपनी खरीद लिया और इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी को खरीद लिया तो भाई साहब एक तो बाजार में हल्ला मच गया कि ये क्या हो गया और इनको देख के बाकी भी बिजनेस में कॉन्फिडेंस आया कि यस हम भी बाहर जा सकते हैं हम भी बाहर अपना बिजनेस फैला सकते हैं हम भी एक्सपोर्ट कर सकते हैं हम भी ब्रांड खरीद सकते हैं तो ये जो शुरुआत है ना इंडियन कंपनी के डोमिनेंस की फीयरलेस होने की नीडर होने की यह रतन टाटा जी की देन है उसी साल सन 2000 में इनको मिला पद्मभूषण जो कि भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है 2004 में ये लेके आए टीसीएस का आईपीयू टीसीएस में याद है 1970 में इन्होंने काम किया था इनको पता तो था !

अगर Ratan Tata ना होते तो Tata Group नहीं होता । Biography of Ratan Tata । Case Study

कंपनी क्या है उसका उस समय इन्होंने आईपीओ किया और आज की डेट में टीसीएस देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है टा ग्रुप की जितनी भी कंपनियां है उनमें 90 पर प्रॉफिट अकेली टीसीएस देती है 2006 में लॉन्च किया डीटीएच सर्विस टा स्काय 2008 में भाई साहब इन्होंने फिर एक बार दाव खेला जगवार को खरीदा लैंडरोवर को खरीदा और उसी साल उनको भारत का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान पद्म विभूषण मिला 2012 में एज अ चेयरमैन इन्होंने रिटायरमेंट ले लिया और सायरस मिस्त्री को अपना उत्तराधिकारी अपॉइंट्स करना चाह रहा हूं 2000 में इनको मिला पद्मभूषण जो कि तीसरा सबसे बड़ा सम्मान था

2008 में मिला इनको पद्म विभूषण जो कि दूसरा दूसरा सबसे बड़े सम्मान था लेकिन ये हकदार हैं देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न के तो वैसे अभी खबरें आ रही है कि महाराष्ट्र सरकार ने थोड़ी प्रयास कर दिया है प्रपोजल कर दिया है सरकार पे कंटीन्यूअस दबाव बनाना जरूरी है तो मेरी आप जितने भी रतन टाटा जी के फैन प्रशंसक हैं उनकी दिल से इज्जत करते हैं उनसे रिक्वेस्ट है अपन ट्रेंड करते हैं # भारत रत्न फर रतन टाटा मैंने आपको हैशटैग दिखा दिया स्क्रीन पे एडिटर साहब दिखा देना आप सब जने भाई साहब इसको ट्रेन करेंगे आज के पहले अपन ने बीएसएनएल पे एक ट्रे चलाया था जो कि नेशनल लेवल पर गूंजा था अगर हम बात करें रतन टाटा जी के अदर अचीवमेंट के बारे में मैंने कहा ना भारत देश को अगर किसी चीज की जरूरत होती है सबसे पहले टाटा ग्रुप आता है !

तो आज की रेट में हमको पता है कि अगर वर्ल्ड लेवल पे टेक्नोलॉजी में आगे जाना है तो हमको चाहिए भाई साहब चिप सेमीकंडक्टर चिप पर उसका प्लांट में भाई साहब एक्सपर्टीज बहुत लगती है पैसा बहुत लगता है रिस्क बहुत लगता है हर कोई रिस्क ले नहीं सकता रतन टाटा जी आ गया है टा ग्रुप आगे आया और आज सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सबसे बड़ा काम रतन टाटा जीगा टाटा ग्रुप ही कर रहा है आज की डेट में हर कंपनी कह रही है हम भाई साहब इंडिया के बाहर एक्सपोर्ट कर रहे हैं बाहर एक्सपोर्ट कर रहे हैं ये प्रेरणा ये इंस्पिरेशन उसकी शुरुआत रतन टाटा जी ने की थी 60 पर रेवेन्यू टाटा ग्रुप का इंडिया के बाहर से लाके अपन बात करते हैं!

चैरिटी की जब भी अमीर व्यक्तियों की लिस्ट आती है उसमें बाकी सबका नाम आता है अंबानी आता है अडानी आता है बजज आता है पुवाल आता है सब आता है रजन टाटा जी का नाम उस लिस्ट में नहीं आता क्यों क्योंकि उन्होंने कहा कि वो अब टा ग्रुप के सबसे बड़े शेयर होल्डर नहीं है टाटा ग्रुप के जो सबसे बड़े शेयर होल्डर है वो है टा ट्रस्ट यानी इस टाटा ग्रुप जितना भी पैसा कमाता है उसका डिविडेंड जाता है टा संस में और टा संस का जितना भी पैसा आता है !

उसका सबसे बड़ा शेयर होल्डर है टा ट्रस्ट और वो पूरा पैसा समाज सेवा पे खर्च होता है तो टेक्निकली देखा जाए तो
टा ग्रुप में जो ओनर है वो ट्रस्ट है कोई व्यक्ति नहीं रतन टाटा जी ने कोरोना से फाइट के लिए 00 करोड़ का दान दिया था 2008 में जब ताज पे अटैक हुआ था कोई और प्लेयर होता तो कहता अ जी भैया दूर रहो यहां पे आतंकवादी हम सेफ रहे रतन टाटा जी उस समय सड़क प खड़े रहे थे जब तक आतंकवादी रहे थे और ऑपरेशन चल रहा था रतन टाटा जी खुद वहां पे पूरी स्थिति को मॉनिटर कर रहे थे और वहां पे जो भी व्यक्ति जख्मी हुआ जिसको भी ट्रॉमा हुआ चाहे वो होटल का बंदा था !

या होटल के आसपास वाला या कोई भी एक्स वाई जड सबके लिए आज तक भी वो सर्विसेस चला रहे हैं उसके लिए अलग से ताज पब्लिक सर्विस ट्रस्ट बनाया जो कि होटल और उसके आसपास के जो व्यक्ति है उनकी सेवा के लिए आज भी काम कर रहा है अगर आपका घर हो हज 2000 5000 करोड़ का या ऑफिस हो इतने महंगे घर ऑफिस में अगर कोई आवारा कुत्ता आ जाए तो आप क्या करेंगे आप बोलेंगे अरे सर मैं गार्ड रखूंगा मैं भगा दूंगा उसको ये कर दूंगा रजन टाटा जी ने एक बार बम्बे हाउस में देखा या आवारा कुत्ते घूम रहे हैं !

तो उन्होंने कहा अरे यार ये बिचारे कहां का खाते होंगे उन्होंने बम्बे हाउस में अलग से व्यवस्था कराई है कि जहां पे आवारा कुत्तों के लिए जगह बनाई है कि यहां पर आके वो रह सकते हैं और उनके खाने की व्यवस्था वो करते हैं कुछ लोग कहते हैं कि अजी साहब बिजनेस में अगर बड़ा बनना है तो भैया स्मोकिंग करनी पड़ती है शराब पीनी पड़ती है पार्टियों में जाना पड़ता है देश का सबसे सम्मानीय व्यक्ति और देश के सबसे बड़े ग्रुप को बनाने वाला खुद कभी स्मोकिंग नहीं की कभी ड्रिंकिंग नहीं की वो सी सिंपल टी टोटलर थे !

इनकी डॉग रिलेटेड एक स्टोरी और भी है इनको जब ब्रिटेन की महारानी ने बुलाया कि तुमको सर रतन टाटा जी की उपाधि देंगे उस दिन पर्टिकुलर डे जब सम्मान होने वाला था ये वहां पहुंचे नहीं तो पता पड़ा क्यों नहीं पहुंचे क्यों नहीं पहुंचे तो पता चला इनके एक डॉग की तबीयत खराब थी इने कहा इसका ध्यान रखना जरूरी है अवार्ड तो आते जाते रहते हैं तो एक सिंपल डॉग की सेवा करने के लिए ब्रिटेन का अवार्ड ठुकरा दे वो है रतन टाटा रतन टाटा जी बिजनेस के भगवान हैं और वह मैं हमेशा कहता हूं और उसका एक प्रूफ और है एक जो एमसीए सरकारी संस्था है मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स जो इस पे प्लान करती है !

भैया य जो कंपनीज है इनका काम वो देखती है उसको डिजिटलाइज करने का प्रपोजल आया वो प्रपोजल दिया गया टीसीएस को तो टीसीएस ने एक प्रपोजल दिया कि डिन नंबर इशू करेंगे डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर जो भी व्यक्ति प्राइवेट लिमिटेड में है उस सबके पास डिन है देश का सबसे पहला डिन जो कि है रतन टाटा जी के नाम पे अब किस्से कहानी तो और भी है क्योंकि रतन टाटा जी का व्यक्तित्व ही इतना बड़ा था लेकिन अभी इस article को अपन यही विराम देते हैं तो रटन टाटा जी के प्रति आपका जो प्यार सम्मान था जो भी आपको शब्दों में पिरो के कहना चाहते हैं कमेंट बॉक्स आपके लिए खुला है वहां कीजिए मैं कोशिश करूंगा हर कमेंट को पर्सनली पढ़ूं और लाइक करूं और भारतरत्न रतन टाटा मिलते हैं धन्यवाद जय

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चिराग पासवान बने एनडीए का बिकाऊ चेहरा, बिहार से महाराष्ट्र तक बढ़ी डिमांड, चुनावी सभाओं में गठबंधन के पोस्टरों में मिली जगह

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एनडीए में चिराग पासवान की अहमियत बढ़ गई है. अभी तक उनका चेहरा बिहार और झारखंड में इस्तेमाल होता था. अब महाराष्ट्र चुनाव में भी उन्हें पोस्टरों पर जगह दी गई है.

पटना- लोजपा रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान का कद लगातार बढ़ता जा रहा है. चिराग पासवान ने पिछले लोकसभा चुनाव 2024 में खुद को साबित किया था. इसलिए भाजपा ने सबसे पहले झारखंड चुनाव में भी उनकी पार्टी को एनडीए का हिस्सा रखा. और महाराष्ट्र में पीएम मोदी के पीछे चिराग पासवान की तस्वीर लगाई गई है. जबकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वहां जगह नहीं मिली है.

दरअसल, 8 नवंबर को महाराष्ट्र के धुले में पीएम मोदी की रैली थी. रैली के मंच पर कई भाजपा नेताओं की तस्वीरें लगाई गई थीं. इसके साथ ही चिराग पासवान की तस्वीर भी लगाई गई थी. तस्वीर बिल्कुल बीच के फ्रेम में है. जबकि रैली के मंच पर चिराग पासवान के अलावा एनडीए के किसी नेता की तस्वीर नहीं लगाई गई थी. यहां तक ​​कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर भी नहीं लगाई गई। ऐसे में सवाल यह है कि चिराग पासवान की तस्वीर क्यों लगाई गई।

गौरतलब है कि चिराग की एलजेपी देश की एकमात्र ऐसी पार्टी थी जिसने लोकसभा चुनाव में 100 फीसदी जीत हासिल की थी। यानी एनडीए में चिराग पासवान को 5 लोकसभा सीटें मिलीं और एलजेपी रामविलास को 5 सीटें मिलीं। जब चिराग पासवान एनडीए से बाहर थे, तब भी पीएम मोदी के प्रति सम्मान उनके होठों पर था। उनका हमला सिर्फ सीएम नीतीश कुमार पर केंद्रित था। चुनाव में मिली सफलता ने चिराग का कद राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया।