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बिहार के नवादा के लाल चंदन जम्मू-कश्मीर में शहीद, पिछले साल हुई थी लखीसराय की शिल्पी से शादी

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Published On: December 23, 2023

बेहद गरीब परिवार में जन्मे चंदन 2017 में सेना में हुए थे भर्ती: नवादा के 24 वर्षीय बेटे चंदन कुमार जम्मू-कश्मीर के पुंछ में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गये. वह जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के नारोमुरार गांव के रहने वाले थे. गरीब परिवार में जन्मे चंदन 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। गुरुवार की देर रात परिजनों को मोबाइल पर इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. नारोमुरार गांव के मौलेश्वर सिंह और जयंती देवी की चार संतानों में दूसरे नंबर के चंदन 89 आर्म्ड रेजिमेंट के जवान थे. उनके बड़े भाई पीयूष कुमार ने बताया कि रात करीब साढ़े बारह बजे मोबाइल पर सूचना मिली कि चंदन आतंकी हमले में शहीद हो गये हैं. यह खबर मिलते ही पूरा परिवार सन्न रह गया। माता-पिता व अन्य परिजनों की चीखें गूंजने लगीं। आपको बता दें कि राइफल मैन चंदन कुमार अपने पांच साथी जवानों के साथ शहीद हो गए हैं. चंदन को किशोरावस्था में ही सेना में भर्ती होने की इच्छा थी। उन्होंने गांव से सटे एक खेत में तैयारी शुरू कर दी. परिवार का पूरा सहयोग मिला. साल 2017 में उन्होंने सफलता हासिल की और महाराष्ट्र के अहमदनगर में नौकरी ज्वाइन कर ली. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में स्थित सरकारी स्कूल में हुई।

महाराष्ट्र के अहमद नगर में नौकरी ज्वाइन की थी

चंदन को किशोरावस्था में ही सेना में भर्ती होने की इच्छा थी। उन्होंने गांव से सटे एक खेत में तैयारी शुरू कर दी. परिवार का पूरा सहयोग मिला. साल 2017 में उन्होंने सफलता हासिल की और महाराष्ट्र के अहमदनगर में नौकरी ज्वाइन कर ली. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में स्थित सरकारी स्कूल में हुई। सातवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वारिसलीगंज के बीके साहू इंटर स्कूल से 12वीं पास की. इसके बाद सेना भर्ती की तैयारी शुरू हो गई।

पिछले साल शादी लखीसराय में हुई थी

पिछले साल ही चंदन की शादी हुई थी. उनकी शादी लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाने के सरलाही गांव निवासी अनिल सिंह की बेटी शिल्पी कुमारी से हुई थी. हालाँकि उनके कोई संतान नहीं है. वह रोजाना ड्यूटी से छुट्टी के बाद पत्नी से मोबाइल पर बात करता था।

कभी-कभी पत्नी ही कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी सास से अपने पति की बात करवाती थी। चंदन ने पिछले मंगलवार को अपनी मां से बात की थी. जबकि गुरुवार रात 11 बजे गश्त पर निकलने से पहले उनकी पत्नी शिल्पी से बात हुई थी. शहीद की मां रोते हुए कह रही थी कि पूरे परिवार को चंदन पर भरोसा था, वह सब टूट गया. मां ने साहस दिखाते हुए कांपती जुबान से कहा कि अगर उनका दूसरा बेटा भी सेना में भर्ती होने के लायक होता तो वह उसे आतंकियों से बदला लेने के लिए भेजतीं.

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